Thursday, 29 May 2014
Wednesday, 28 May 2014
Tuesday, 27 May 2014
Sunday, 18 May 2014
महाराष्ट्र
:
मोदी
लहर ने विदर्भ में भी बदल दिए
सारे समीकरण
सभी
दस सीटों पर फहराया भगवा
परचम
जातिगत
भावनाओं और सभी तरह
के क्षेत्रीय समीकरणों को
नकाराते हुए भाजपा
के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी
नरेंद्र मोदी
की
लहर
पर सवार विदर्भ के मतदाताओं
ने भी लोकसभा चुनाव-
2014 के
परिणामों को राष्ट्रीय
जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)
के
भाजपा एवं शिवसेना के प्रत्याशियों
के प्रति अपना प्रबल समर्थन
व्यक्त कर दिया है.
विदर्भ
की दस में से दस,
अर्थात
शत-प्रतिशत
जनादेश राजग के पक्ष में
गया.
आठ
चरणों में देश भर सम्पन्न हुए
इन चुनावों में विदर्भ की सभी
दस सीटों पर तीसरे चरण में
पिछले माह 10
अप्रैल
को मतदान हुआ था.
मतदान
के कुछ ही दिनों बाद संभावित
परिणामों के सन्दर्भ में
परम्परागत अनुमान यही थे कि
इस बार विदर्भ की कम
से कम सात सीटें राजग के खाते
में जुड़ जाएंगी.
भंडारा-गोंदिया
और वर्धा के संसदीय क्षेत्र
को लेकर कयास लगाए जा रहे थे
कि इन दो सीटों पर राकांपा
प्रत्याशी केंद्रीय मंत्री
प्रफुल पटेल एवं पूर्व सांसद
दत्ता मेघे के पुत्र कांग्रेस
प्रत्याशी सागर मेघे जीत
जाएंगे.
इसी
प्रकार यह आशंका भी व्यक्त
की जा रही थी कि अमरावती
क्षेत्र से इस बार शिवसेना
प्रत्याशी आनंदराव अडसूल
संभवतः अपनी सीट खो बैठेंगे.
लेकिन
मोदी लहर का जलवा कुछ ऐसा रहा
कि सभी दस की दस सीटों में छह
भाजपा की और चार शिवसेना की
झोली में जा समाई.
यह
एक 'अंडर
करेंट'
ही
था.
जीत
जाने की खुशफहमी में जी रहे
अनेक कांग्रेस और राकांपा के
नेताओं के लिए यह परिणाम
अप्रत्याशित और एक धक्कादायक
रहा.
मोदी
लहर के चलते विदर्भ में जातिगत
समीकरण ध्वस्त हो गए.
धार्मिक
आधार पर मतों का ध्रुवीकरण
जरूर हुआ,
लेकिन
उसका फायदा भगवा गठबंधन को
हुआ.
युवा
मतदाताओं और रसोई गैस की राशनिंग
व महंगाई से त्रस्त महिलाओं
ने जाति के आधार पर चली आ रही
दलगत निष्ठा की तमाम धारणाओं
को विदर्भ में ध्वस्त कर दिया.
मतदाताओं
के ये दो सबसे बड़े वर्ग मोदी
लहर के चलते भगवा गठबंधन की
ओर झुके तथा कांग्रेस-राकांपा
की सारी उम्मीदों को तहस-नहस
कर दिया.
पूर्वी
विदर्भ की 5
सीटों
में से 4
भाजपा
को और 1
शिवसेना
को मिलीं.
नागपुर
संसदीय क्षेत्र भाजपा के लिए
प्रतिष्ठा की सीट बन गई थी.
क्योंकि
पार्टी के पूर्व अध्यक्ष तथा
हाल के दिनों में केंद्र की
राजनीति में भाजपा में नरेंद्र
मोदी के बाद दूसरे सबसे प्रमुख
चेहरे के रूप में उभरे नितिन
गडकरी यहां से मैदान में थे.
उनका
मुकाबला सात बार लोकसभा चुनाव
जीत चुके वरिष्ठ कांग्रेसी
नेता एवं केंद्रीय मंत्री
विलास मुत्तेमवार से था.
आशंका
थी कि गडकरी के लिए कांग्रेस
को दलितों तथा मुसलमानों के
साथ-साथ
कुणबी वोट बैंक का सर्मथन कड़ी
चुनौती साबित होगा.
लेकिन
नतीजों से स्पष्ट है कि पूर्व
भाजपा अध्यक्ष ने सारे जातिगत
समीकरण ध्वस्त कर जीत हासिल
की.
वह
कांग्रेस के परंपरागत वोट
बैंक में भी सेंध लगाने में
सफल हो गए.
विलास
मुत्तेमवार ने लोकसभा चुनाव
में जनता के फैसले को कबूल
किया है.
उन्होंने
कहा कि लोगों का गुस्सा महंगाई
को लेकर फूटा है.
आम
जनता बढ़ती
महंगाई से त्रस्त थी.
जनता
की नाराजगी के इसी मुद्दे को
लेकर भाजपा ने लोगों के मन की
बात को छू लिया.
रामटेक
लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के
मतदाताओं ने भी
शिवसेना
उम्मीदवार कृपाल तुमाने पर
भरोसा जताया.
उन्होंने
कांग्रेस के दिग्गज नेता व
पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल
वासनिक को पराजित किया.
खासबात
यह रही कि तुमाने का धनुष-बाण
रामटेक संसदीय क्षेत्र के
सभी विधानसभा क्षेत्रों में
चला.
राकांपा
नेता व अन्न व नागरी आपूर्ति
मंत्री अनिल देशमुख के विधानसभा
निर्वाचन क्षेत्र काटोल,
कांग्रेस
विधायक सुनील केदार का
सावनेर क्षेत्र में और
वित्त
राज्य मंत्री राजेंद्र मुलक
का भी प्रभाव उमरेड
में वासनिक
के हक में काम नहीं कर सका.
देशमुख,
केदार,
मुलक
की तिकड़ी
ने वासनिक के सर्मथन में कई
सभाएं कीं,
रोड
शो किए.
फिर
भी उनके निर्वाचन क्षेत्रों
में कांग्रेस उम्मीदवार वासनिक
की
दाल नहीं गली.
रामटेक
शहर कांग्रेस का गढ़
माना
जाता है.
वहां
भी पंजे का अस्तित्व संकट में
नजर आया.
भंडारा
में राकांपा के दिग्गज नेता
प्रफुल्ल पटेल की ऐसी करारी
हार की उम्मीद किसी ने नहीं
की होगी.
राकांपा
को उम्मीद थी कि कुनबी वोट
बैंक अगर भाजपा के नाना पटोले
के साथ है तो दलित,
मुस्लिम
व पोवार वोट बैंक उन्हें सहारा
देगा.
भंडारा-गोंदिया
निर्वाचन क्षेत्र में कुणबी
और पोवार दोनों ने ही पटोले
का जबर्दस्त सर्मथन किया.
आदिवासी
भी भाजपा के पक्ष में रहे और
लोधी समाज ने भी प्रफुल्ल भाई
से मुंह मोड़ लिया.
चंद्रपुर
संसदीय क्षेत्र में भाजपा
प्रत्याशी हंसराज अहीर भी
मोदी लहर पर सवार होकर अपनी
नैया पार उतार ले जाने में सफल
रहे.
जुझारू
नेता की पहचान रखने वाले अहीर
के लिए दुबारा यह चुनाव जीत
पाना आसान नहीं था.
एक
ओर उनकी मेहनत और दूसरी ओर
भाजपा का्र्यकताओं की सक्रियता
के साथ-साथ
मोदी लहर काम कर गया.
इसके
अलावा,
उनके
प्रमुख प्रतिद्वंदी कांग्रेस
के संजय देवतले का उनकी अपनी
ही पार्टी के पुगलिया गुट का
विरोध भी उनकी जीत को एक बड़ी
चमक दे गया.
गढ़चिरोली-चिमूर
लोकसभा क्षेत्र आदिवासी बहुल,
पिछड़ा
और नक्सल प्रभावित क्षेत्र
है.
यहां
भी भाजपा की मोदी लहर ने भाजपा
प्रत्याशी युवा नेता अशोक
नेते के लिए जीत को आसान बनाने
में बहुत काम आया.
भाजपा
के विकास का प्रश्न क्षेत्र
के मतदाताओं के लिए अहम बन
गया.
क्षेत्र
के पिछड़ा होने का दंश झेल रहे
इस क्षेत्र के मतदाताओं को
नरेंद्र मोदी की बातें कुछ
अधिक ही अपील कर गईं.
कांग्रेस
प्रत्याशी नामदेव उसेंडी के
लिए क्षेत्र का पिछड़ापन अधिक
ही भारी पड़ा.
पश्चिम
विदर्भ में भी यही हाल रहा.
इस
क्षेत्र की 3
सीटें
सेना की और 2
भाजपा
की झोली में गए.
लोकसभा
चुनावों के नतीजे यहां अमरावती
सीट पर एक ओर राकांपा प्रत्याशी
के लिए बेहद चौंकाने वाले
साबित हुए हैं,
दूसरी
ओर शिवसेना के विजयी प्रत्याशी
आनंदराव अडसूल के लिए भी अपना
यह गढ़ बचा लेना केवल मोदी लहर
के कारण ही संभव हो पाया.
इस
चुनाव में राकांपा को मिली
हार पूरी तरह आपसी विरोधों
का ही नतीजा साबित हुई है. ज्ञातव्य
है कि इस सीट से राकांपा द्वारा
नवनीत राणा को टिकट देते ही
राकांपा के भीतर ही विरोध के
सुर उठने लगे थे.
कल
तक राकांपा सुप्रीमो शरद पवार
के कट्टर सर्मथक कहलाने वाले
संजय और सुलभा खोड़के दंपति
ने बागी बन गए और सीधे बसपा
प्रत्याशी से हाथ मिला लिया.
कांग्रेस
नेताओं ने भी रवि राणा के साथ
अपने मनमुटाव के चलते खुलेआम
अपने ही गठबंधन के प्रत्याशी
के खिलाफ में काम किया.
इसी
कारण तिवसा विधानसभा क्षेत्र
में कांग्रेस विधायक होते
हुए भी शिवसेना की पहले राउंड
से शुरू हुई बढ़त जीत दर्ज करने
तक खत्म नहीं हुई. इसी
तरह विधायक रवि राणा को अपने
ही बडनेरा निर्वाचन क्षेत्र
में मुंह की खानी पड़ी.
विधायक
पत्नी के ही राकांपा की उम्मीदवार
होने के कारण यहां पर विधायक
विरोधी लहर राकांपा प्रत्याशी
के लिए वोट काटने वाली साबित
हुई.
राकांपा
प्रत्याशी के लिए इस निर्वाचन
क्षेत्र में बसपा का हाथी भी
बेहद जानलेवा साबित हुआ.बसपा
के पारंपरिक वोटों के अलावा
खोड़के दंपति के सहयोग से मिले
अतिरिक्त वोट भी राकांपा के
लिए घातक साबित हुए.
इसी
तरह कल तक कांग्रेस गठबंधन
की टिकट पर लड़ने वाले रिपा
नेता राजेंद्र गवई की नाराजी
के बाद उनका चुनावी मैदान में
उतरना भी इस गठबंधन के वोटों
में बंटवारा करने वाला साबित
हुआ.
यदि
कांग्रेस विचारों के वोटों
में इस तरह बंटवारा नहीं हुआ
होता तो अमरावती में इस बार
शिवसेना का गढ़ ढहना लगभग तय
माना जा सकता था. सेना
प्रत्याशी अडसूल ने भी अपनी
हालत पतली देखते हुए नरेंद्र
मोदी के नाम पर ही वोट मांग-मांग
कर अपनी जीत सुनिश्चत कर ली.
वर्धा
में तगड़े कुणबी वोट बैंक के
बावजूद इस समाज के कद्दावर
नेता दत्ता मेघे अपने पुत्र
सागर मेघे को शर्मनाक हार से
बचा नहीं सके.
भाजपा
के रामदास तड़स तेली समाज के
हैं.
परिणामों
से जाहिर है कि मोदी लहर के
चलते उन्हें कुणबी ही नहीं
अन्य समुदायों के वोट भी मिले.
यवतमाल-वाशिम
क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी
और राज्य में मंत्री शिवाजी
राव मोघे ने सांसद के रूप में
हैट्रिक बना चुकी शिवसेना की
भावना गवली को कड़ी टक्कर देने
में सफल तो जरूर रहे,
लेकिन
अपनी जीत सुनिश्चत कर पाने
में विफल ही रहे.
मोघे
को अपनी ही पार्टी के लोगों
का उतना समर्थन नहीं मिल पाया,
जितना
अपेक्षित था.
प्रदेश
कांग्रेस अध्यक्ष माणिकराव
ठाकरे के समर्थक उनके पुत्र
राहुल ठाकरे को वहां से कांग्रेस
उम्मीदवार बनाना चाहते थे.
भावना
लेकिन अपनी व्यक्तिगत कर्मठता,
अच्छी
छवि और मोदी लहर के सहारे अपनी
चौथी जीत सुनिश्चत करने में
सफल हो गईं.
अकोला
में निष्क्रिय होने का ठप्पा
लगने के बावजूद भाजपा के संजय
धोत्रे ने तीसरी बार जीत हासिल
की.
यहां
दलित भारिपा-बहुजन
महासंघ के प्रकाश आंबेडकर
तथा मुस्लिम कांग्रेस के
हिदायत पटेल के पक्ष में खड़े
दिखे.
लेकिन
अन्य सभी वर्ग,
जिनमें
कांग्रेस सर्मथक भी हैं,
ने
एकमुश्त धोत्रे के पक्ष में
मतदान किया.
इस
चुनाव में 2
लाख
3
हजार
मतों के
अंतर से
संजय धोत्रे ने जीत दर्ज करते
हुए हैट्रिक की है.
यहां
कांग्रेस
के हिदायत पटेल को करारी शिकस्त
मिली है.
बुलढाणा
संसदीय क्षेत्र के राकांपा
उम्मीदवार कृष्णराव इंगले
चुनाव हार गए.
शिवसेना
के प्रताप जाधव को
भी यहां भाजपा के मोदी लहर का
बड़ा सहारा मिला.
विदर्भ
में नाना पटोले प्रफुल
पटेल को पराजित कर सर्वाधिक
6
लाख
से अधिक मतों से जीते
दो लाख से अधिक के अंतर से जीतने वालों में गडकरी, अहीर, नेते और धोत्रे
महाराष्ट्र
के विदर्भ
क्षेत्र
में भी लोकसभा-2014 चुनाव
केंद्र में सत्तारूढ़ संयुक्त
प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग)
के
दल कांग्रेस और राष्ट्रीय
कांग्रेस पार्टी (राकांपा)
के
लिए बहुत ही बुरा रहा. मोदी
लहर ने विदर्भ में भी सारे
जातीय एवं राजनीतिक समीकरणों
को ध्वस्त करते हुए सभी
सीटों को भगवामय कर दिया.
यहां
की सभी दस सीटों से इन दोनों
दलों के प्रत्याशी चुनाव हार
गए हैं.
कांग्रेस
ने विदर्भ से जहां सात सीटों
पर अपने उम्मीदवार खड़े किए
थे,
वहीं
राकांपा ने अपने तीन प्रत्याशी
उतारे थे.
राष्ट्रीय
स्तर पर पहचान बनाने के लिए
पहली बार विदर्भ से भी अपने
प्रत्याशी उतारने वाली आम
आदमी पार्टी (आप)
सभी
सीटों पर चौथे-पांचवे
क्रम पर ही आ सकी.
यही
हाल बसपा के साथ-साथ
रिपब्लिकन पार्टी के विभिन्न
पक्षों वाले दलों का भी रहा.
विदर्भ से केंद्र सरकार मंत्री रहे कांग्रेस के बड़े नेता और नागपुर लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी विलास मुत्तेमवार तथा रामटेक क्षेत्र से मुकुल वासनिक एवं राकांपा के भंडारा-गोंदिया क्षेत्र से प्रफुल पटेल के साथ-साथ यवतमाल-वाशिम क्षेत्र से राज्य कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मंत्री शिवाजी राव मोघे भी चुनाव हार गए हैं.
विदर्भ के कुल दस में से चार लोकसभा क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहां के मतदाताओं ने भाजपा प्रत्याशियों को दो लाख से अधिक मतों से पराजित किया है. इस बड़े अंतर से जीतने वालों में भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी के अलावा चंद्रपुर के भाजपा उम्मीदवार हंसराज अहीर, गढ़चिरोली-चिमूर लोकसभा क्षेत्र के भाजपा प्रत्याशी अशोक नेते और अकोला संसदीय क्षत्र के भाजपा प्रत्याशी संजय धोत्रे हैं.
घोषित चुनाव परिणामों के अनुसार पूर्व विदर्भ के नागपुर, भंडारा-गोंदिया, रामटेक, चंद्रपुर और गढ़चिरोली-चिमूर संसदीय क्षेत्र एवं पश्चिम विदर्भ के अमरावती, अकोला, वर्धा, यवतमाल-वाशिम और बुलढाणा संसदीय क्षेत्र से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने छह सीटों पर एवं बाकी के चार सीटों पर शिवसेना के प्रत्याशी विजयी रहे.
नागपुर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी नितिन गडकरी ने कांग्रेस के नेता और केंद्रीय मंत्री विलास मुत्तेमवार को सर्वाधिक 284828 मतों के अंतर से हरा दिया. गडकरी को कुल 587767 वोट मिले, जबकि मुत्तेमवार को 302939 मतदाताओं के ही मत प्राप्त हुए.
उधर भंडारा-गोंदिया लोकसभा क्षेत्र में केंद्रीय मंत्री और राकांपा के कद्दावर नेता प्रफुल पटेल को भाजपा को अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी नाना पटोले से 149254 मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा है. पटेल ने जहां कुल 456875 मत हासिल किए, वहीं नाना के पक्ष में 606129 वोट पड़े. विदर्भ के विजयी सभी प्रत्याशियों में नाना ही एकमात्र प्रत्याशी रहे, जिन्हें सर्वाधिक 6 लाख से अधिक मतदाताओं का समर्थन हासिल हुआ है.
विदर्भ से तीसरे केंद्रीय मंत्री रहे रामटेक क्षेत्र के कांग्रेस उम्मीदवार मुकुल वासनिक हैट्रिक नहीं बना सके. शिवसेना ने उन्हें पराभूत कर अपना गढ़ फिर से फतह कर लिया. उन्हें कुल 344101 मत ही मिले. जब की वासनिक को 175791 मतों के अंतर से हराने के लिए सेना प्रत्याशी कृपाल तुमने ने क्षेत्र के कुल 519892 मतदाताओं के मत हासिल कर लिए.
इसी प्रकार चंद्रपुर लोकसभा क्षेत्र ने एकबार फिर से अपने जुझारू भाजपा सांसद हंसराज अहीर में अपना भरोसा जताते हुए उन्हें 271780 मतों के अंतर से जिताया. अहीर को कुल 508049 मत मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी संजय देवतले, जिन्हें अपनी ही पार्टी कांग्रेस के मजबूत धड़े के विरोध से गुजरना पड़ रहा था, को मात्र 271780 मतों से ही संतोष करना पड़ा.
गढ़चिरोली संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी अशोक नेते ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस प्रत्याशी नामदेव उसेंडी को 236870 मतों से धूल चटाई. नेते को कुल 535982 मत हासिल हुए, जबकि उसेंडी को 299112 मतों से ही संतोष करना पड़ा.
अमरावती संसदीय क्षेत्र के शिवसेना प्रत्याशी आनंदराव अडसूल फिर से 137932 मतों के अंतर से राकांपा प्रत्याशी नवनीत राणा को हरा कर चुनाव जीत गए हैं. उन्होंने कुल 456472 मत प्राप्त हुए. जबकि श्रीमती नवनीत रवि राणा, जो बडनेरा के विधायक रवि राणा की पत्नी हैं, को कुल 329280 मत प्राप्त हुए.
इधर वर्धा लोकसभा चुनाव क्षेत्र से कांग्रेस के सागर मेघे को भाजपा के रामदास तडस ने कुल 215783 मतों के अंतर से पराजित कर दिया. मेघे को 321735 मत प्राप्त हुए, जबकि तडस ने 537518 प्राप्त किए.
यवतमाल-वाशिम संसदीय क्षेत्र से शिवसेना की प्रत्याशी भावना गवली ने अपने गढ़ पर फिर से कब्जा जमा लिया है. उन्होंने कुल 477905 प्राप्त कर 93816 मतों के अंतर से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस नेता एवं राज्य के मंत्री शिवाजी राव मोघे को पराजित किया. मोघे को 384089 मत मिले.
अकोला लोकसभा क्षेत्र के भाजपा उम्मीदवार संजय धोत्रे एक बार फिर अकोला से अपनी जीत का परचम लहराते हुए अपने निकटतम कांग्रेस प्रत्याशी हिदायत पटेल को 203116 मतों के अंतर से हराया. धोत्रे को जहां 456472 मत मिले, वहीं पटेल ने मात्र 253356 मत पाए.
बुलढाणा संसदीय क्षेत्र के राकांपा उम्मीदवार कृष्णराव इंगले, शिवसेना के प्रताप जाधव से 159579 मतों से चुनाव हार गए हैं. उन्हें कुल 349566 वोट मिले, जबकि सेना के जाधव ने कुल 509145 मत हासिल किए.
दो लाख से अधिक के अंतर से जीतने वालों में गडकरी, अहीर, नेते और धोत्रे
महाराष्ट्र
के विदर्भ
क्षेत्र
में भी लोकसभा-2014 चुनाव
केंद्र में सत्तारूढ़ संयुक्त
प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग)
के
दल कांग्रेस और राष्ट्रीय
कांग्रेस पार्टी (राकांपा)
के
लिए बहुत ही बुरा रहा. मोदी
लहर ने विदर्भ में भी सारे
जातीय एवं राजनीतिक समीकरणों
को ध्वस्त करते हुए सभी
सीटों को भगवामय कर दिया.
यहां
की सभी दस सीटों से इन दोनों
दलों के प्रत्याशी चुनाव हार
गए हैं.
कांग्रेस
ने विदर्भ से जहां सात सीटों
पर अपने उम्मीदवार खड़े किए
थे,
वहीं
राकांपा ने अपने तीन प्रत्याशी
उतारे थे.
राष्ट्रीय
स्तर पर पहचान बनाने के लिए
पहली बार विदर्भ से भी अपने
प्रत्याशी उतारने वाली आम
आदमी पार्टी (आप)
सभी
सीटों पर चौथे-पांचवे
क्रम पर ही आ सकी.
यही
हाल बसपा के साथ-साथ
रिपब्लिकन पार्टी के विभिन्न
पक्षों वाले दलों का भी रहा. विदर्भ से केंद्र सरकार मंत्री रहे कांग्रेस के बड़े नेता और नागपुर लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी विलास मुत्तेमवार तथा रामटेक क्षेत्र से मुकुल वासनिक एवं राकांपा के भंडारा-गोंदिया क्षेत्र से प्रफुल पटेल के साथ-साथ यवतमाल-वाशिम क्षेत्र से राज्य कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मंत्री शिवाजी राव मोघे भी चुनाव हार गए हैं.
विदर्भ के कुल दस में से चार लोकसभा क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहां के मतदाताओं ने भाजपा प्रत्याशियों को दो लाख से अधिक मतों से पराजित किया है. इस बड़े अंतर से जीतने वालों में भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी के अलावा चंद्रपुर के भाजपा उम्मीदवार हंसराज अहीर, गढ़चिरोली-चिमूर लोकसभा क्षेत्र के भाजपा प्रत्याशी अशोक नेते और अकोला संसदीय क्षत्र के भाजपा प्रत्याशी संजय धोत्रे हैं.
घोषित चुनाव परिणामों के अनुसार पूर्व विदर्भ के नागपुर, भंडारा-गोंदिया, रामटेक, चंद्रपुर और गढ़चिरोली-चिमूर संसदीय क्षेत्र एवं पश्चिम विदर्भ के अमरावती, अकोला, वर्धा, यवतमाल-वाशिम और बुलढाणा संसदीय क्षेत्र से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने छह सीटों पर एवं बाकी के चार सीटों पर शिवसेना के प्रत्याशी विजयी रहे.
नागपुर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी नितिन गडकरी ने कांग्रेस के नेता और केंद्रीय मंत्री विलास मुत्तेमवार को सर्वाधिक 284828 मतों के अंतर से हरा दिया. गडकरी को कुल 587767 वोट मिले, जबकि मुत्तेमवार को 302939 मतदाताओं के ही मत प्राप्त हुए.
उधर भंडारा-गोंदिया लोकसभा क्षेत्र में केंद्रीय मंत्री और राकांपा के कद्दावर नेता प्रफुल पटेल को भाजपा को अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी नाना पटोले से 149254 मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा है. पटेल ने जहां कुल 456875 मत हासिल किए, वहीं नाना के पक्ष में 606129 वोट पड़े. विदर्भ के विजयी सभी प्रत्याशियों में नाना ही एकमात्र प्रत्याशी रहे, जिन्हें सर्वाधिक 6 लाख से अधिक मतदाताओं का समर्थन हासिल हुआ है.
विदर्भ से तीसरे केंद्रीय मंत्री रहे रामटेक क्षेत्र के कांग्रेस उम्मीदवार मुकुल वासनिक हैट्रिक नहीं बना सके. शिवसेना ने उन्हें पराभूत कर अपना गढ़ फिर से फतह कर लिया. उन्हें कुल 344101 मत ही मिले. जब की वासनिक को 175791 मतों के अंतर से हराने के लिए सेना प्रत्याशी कृपाल तुमने ने क्षेत्र के कुल 519892 मतदाताओं के मत हासिल कर लिए.
इसी प्रकार चंद्रपुर लोकसभा क्षेत्र ने एकबार फिर से अपने जुझारू भाजपा सांसद हंसराज अहीर में अपना भरोसा जताते हुए उन्हें 271780 मतों के अंतर से जिताया. अहीर को कुल 508049 मत मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी संजय देवतले, जिन्हें अपनी ही पार्टी कांग्रेस के मजबूत धड़े के विरोध से गुजरना पड़ रहा था, को मात्र 271780 मतों से ही संतोष करना पड़ा.
गढ़चिरोली संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी अशोक नेते ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस प्रत्याशी नामदेव उसेंडी को 236870 मतों से धूल चटाई. नेते को कुल 535982 मत हासिल हुए, जबकि उसेंडी को 299112 मतों से ही संतोष करना पड़ा.
अमरावती संसदीय क्षेत्र के शिवसेना प्रत्याशी आनंदराव अडसूल फिर से 137932 मतों के अंतर से राकांपा प्रत्याशी नवनीत राणा को हरा कर चुनाव जीत गए हैं. उन्होंने कुल 456472 मत प्राप्त हुए. जबकि श्रीमती नवनीत रवि राणा, जो बडनेरा के विधायक रवि राणा की पत्नी हैं, को कुल 329280 मत प्राप्त हुए.
इधर वर्धा लोकसभा चुनाव क्षेत्र से कांग्रेस के सागर मेघे को भाजपा के रामदास तडस ने कुल 215783 मतों के अंतर से पराजित कर दिया. मेघे को 321735 मत प्राप्त हुए, जबकि तडस ने 537518 प्राप्त किए.
यवतमाल-वाशिम संसदीय क्षेत्र से शिवसेना की प्रत्याशी भावना गवली ने अपने गढ़ पर फिर से कब्जा जमा लिया है. उन्होंने कुल 477905 प्राप्त कर 93816 मतों के अंतर से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस नेता एवं राज्य के मंत्री शिवाजी राव मोघे को पराजित किया. मोघे को 384089 मत मिले.
अकोला लोकसभा क्षेत्र के भाजपा उम्मीदवार संजय धोत्रे एक बार फिर अकोला से अपनी जीत का परचम लहराते हुए अपने निकटतम कांग्रेस प्रत्याशी हिदायत पटेल को 203116 मतों के अंतर से हराया. धोत्रे को जहां 456472 मत मिले, वहीं पटेल ने मात्र 253356 मत पाए.
बुलढाणा संसदीय क्षेत्र के राकांपा उम्मीदवार कृष्णराव इंगले, शिवसेना के प्रताप जाधव से 159579 मतों से चुनाव हार गए हैं. उन्हें कुल 349566 वोट मिले, जबकि सेना के जाधव ने कुल 509145 मत हासिल किए.
Saturday, 12 April 2014
राजनीतिक दलों को चंदा बांट रहे उद्योगपति, व्यापारी और धंधेबाज
राजनीतिक दलों को चंदा बांट रहे उद्योगपति, व्यापारी और धंधेबाज
लोकसभा
चुनावों में मतदान का तीसरा चरण पूरा हो चुका है. प्रचार में पैसे का खेल खुल कर
खेला जा रहा है. उद्योगपति और व्यापारी के साथ-साथ काले धंधों में लिप्त धंधेबाज
दिल खोल कर राजनीतिक दलों को चंदा बांट रहे हैं. आखिर इतना चंदा देने के पीछे उनकी
भी कई उम्मीदें होंगी. एक लगा कर चार कमाने की आशा में होंगे वे लोग. राजनीतिक
दलों ने भी उनसे धन लेने के बदले कुछ न कुछ वादे जरूर किए भी होंगे.
ऐसे में सन् 1974 की बात याद आती है.
धनबाद जिले में जयप्रकाश आंदोलन के दौरान नवंबर महीने मेँ हम निरसा अनुमंडल मुख्यालय के निकट रामपुर पंचायत में "जनता सरकार" के बारे में जागरूकता अभियान चला रहे थे. वहीं पास के ही किसी एक गांव का एक लड़का परितोष भट्टाचार्य हमारे साथ चलता और आसपास के गांवों में ले जाकर लोगों से मिलाता. बांग्ला भाषी परितोष के स्थानीय होने से हमें उससे जनसंपर्क में काफी मदद मिल रही थी. एक दिन शाम को जब हम उसके गांव से ही होते हुए निरसा लौटने लगे तो उसने बताया कि उसके दादा जी कई दिनों से हमसे मिलने की इच्छा जता रहे हैं. हम तुरंत उसके साथ उसके घर पहुंचे.
दादा जी करीब 60 वर्ष के रहे होंगे. वे हमें देख कर खुश हुए. जयप्रकाश बाबू, बातचीत में हमारे आंदोलन और हमारे अभियान के बारे में वे गहरी रुचि दर्शाते रहे. उन्होंने बताया कि वे भी वामपंथी आंदोलनों मे कभी सक्रिय थे. फिर उन्होंने बताया कि जवानी के दिनों में, जब अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन चल रहा था, तब वे अपने हमउम्र साथियों के साथ महात्मा गांधी के अनुयायी हुआ करते थे और कांग्रेसी हुआ रते थे. झरिया में उन्हीं दिनों कांग्रेस की सभा थी. गांधीजी उस अधिवेशन में आ रहे थे. भट्टाचार्य महोदय ने बताया कि वे और उनके लगभग पंद्रह साथी निरसा से 40-50 मील पैदल चल कर झरिया पहुंचे थे.
वहां सभा का बहुत शानदार पंडाल था. खूब भव्य इंतजाम था. गांधीजी से मिलने की उन सबों की इच्छा मुश्किल से पूरी हुई. गांधीजी ने पांच मिनट का समय दिया था. भट्टाचार्य महोदय ने बताया कि "परिचय और इधर-उधर की बातों के बाद मैंने तारीफ की कि सभा का बहुत बढ़िया और भव्य इंतजाम है, इसमें खर्च भी बहुत हुआ होगा, मैंने उत्सुकतावश गांधीजी से यह भी पूछ लिया कि इतने पैसे का इंतजाम कैसे किया आपने? गांधीजी गंभीर हो गए और जवाब दिया- मदन अग्रवाल और यहां के अन्य कोयला खान मालिकों ने यह सब इंतजाम किया है."
भट्टाचार्य महोदय ने कहा कि इसके उपरांत मैंने गांधीजी के समक्ष अपनी सहज जिज्ञासा रखी- आप इन्हें इनके इतने पैसे लौटाएंगे कैसे?" उन्होंने बताया, "मेरे इस प्रश्न पर हमें लगा, गांधीजी नाराज हो गए थे. उन्होंने अपने सचिव महादेव देसाई से कहा, इनसे बात करो. और वे उठ कर वहां से चले गए.”
भट्टाचार्य महोदय ने बताया कि महादेव देसाई बड़े विनम्र थे. उन्होंने मेरी जिज्ञासा शांत करने के लिए कहा कि जब हम आजाद हो जाएंगे, तब इन्हें लौटा देंगे.
भट्टाचार्य महोदय ने कहा कि उनके इस उत्तर से मेरा समाधान नहीं हुआ. गहरी सांस लेते हुए भट्टाचार्य महोदय ने कहा कि आजादी के बाद अब तक देश टाटा, बिड़ला और उन सारे पूंजीपतियों का कर्ज और उसका ब्याज देश चुकाते रहने को मजबूर है. उन्होंने कहा कि आपलोग कृपा कर जयप्रकाश बाबू से कहिएगा कि अब बहुत हो गया. इन पूंजीपतियों को अब और ब्याज देना बंद कराएं.
सन् 1975 के जनवरी में हमने बोकारो में जेपी की आमसभा आयोजित की थी. जेपी ट्रेन से बोकोरो पहुचे. दोपहर में हम उनसे मिले. उन्हें जनता सरकार संबंधी अपने अभियान की जानकारी दी. साथ ही भट्टाचार्य महोदय की बातें भी उनको बताई. जवाब में जेपी ने मुझसे पूछा- "आप सर्वोदय कार्यकर्ता हैं क्या?" मैंने जवाब दिया- नहीं. इसके बाद बातचीत का रुख बदल गया.
आज जब लोकसभा चुनावों में व्यापारियों और उद्योगपतियों से भारी मात्रा में चुनाव का चंदा सभी दल ले रहे हैं, तो भट्टाचार्य महोदय का वह प्रश्न मन में कौंधता है कि देश कब तक इन पूंजीपतियों का कर्ज और ब्याज चुकाता रहेगा?....
--कल्याण कुमार सिन्हा
ऐसे में सन् 1974 की बात याद आती है.
धनबाद जिले में जयप्रकाश आंदोलन के दौरान नवंबर महीने मेँ हम निरसा अनुमंडल मुख्यालय के निकट रामपुर पंचायत में "जनता सरकार" के बारे में जागरूकता अभियान चला रहे थे. वहीं पास के ही किसी एक गांव का एक लड़का परितोष भट्टाचार्य हमारे साथ चलता और आसपास के गांवों में ले जाकर लोगों से मिलाता. बांग्ला भाषी परितोष के स्थानीय होने से हमें उससे जनसंपर्क में काफी मदद मिल रही थी. एक दिन शाम को जब हम उसके गांव से ही होते हुए निरसा लौटने लगे तो उसने बताया कि उसके दादा जी कई दिनों से हमसे मिलने की इच्छा जता रहे हैं. हम तुरंत उसके साथ उसके घर पहुंचे.
दादा जी करीब 60 वर्ष के रहे होंगे. वे हमें देख कर खुश हुए. जयप्रकाश बाबू, बातचीत में हमारे आंदोलन और हमारे अभियान के बारे में वे गहरी रुचि दर्शाते रहे. उन्होंने बताया कि वे भी वामपंथी आंदोलनों मे कभी सक्रिय थे. फिर उन्होंने बताया कि जवानी के दिनों में, जब अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन चल रहा था, तब वे अपने हमउम्र साथियों के साथ महात्मा गांधी के अनुयायी हुआ करते थे और कांग्रेसी हुआ रते थे. झरिया में उन्हीं दिनों कांग्रेस की सभा थी. गांधीजी उस अधिवेशन में आ रहे थे. भट्टाचार्य महोदय ने बताया कि वे और उनके लगभग पंद्रह साथी निरसा से 40-50 मील पैदल चल कर झरिया पहुंचे थे.
वहां सभा का बहुत शानदार पंडाल था. खूब भव्य इंतजाम था. गांधीजी से मिलने की उन सबों की इच्छा मुश्किल से पूरी हुई. गांधीजी ने पांच मिनट का समय दिया था. भट्टाचार्य महोदय ने बताया कि "परिचय और इधर-उधर की बातों के बाद मैंने तारीफ की कि सभा का बहुत बढ़िया और भव्य इंतजाम है, इसमें खर्च भी बहुत हुआ होगा, मैंने उत्सुकतावश गांधीजी से यह भी पूछ लिया कि इतने पैसे का इंतजाम कैसे किया आपने? गांधीजी गंभीर हो गए और जवाब दिया- मदन अग्रवाल और यहां के अन्य कोयला खान मालिकों ने यह सब इंतजाम किया है."
भट्टाचार्य महोदय ने कहा कि इसके उपरांत मैंने गांधीजी के समक्ष अपनी सहज जिज्ञासा रखी- आप इन्हें इनके इतने पैसे लौटाएंगे कैसे?" उन्होंने बताया, "मेरे इस प्रश्न पर हमें लगा, गांधीजी नाराज हो गए थे. उन्होंने अपने सचिव महादेव देसाई से कहा, इनसे बात करो. और वे उठ कर वहां से चले गए.”
भट्टाचार्य महोदय ने बताया कि महादेव देसाई बड़े विनम्र थे. उन्होंने मेरी जिज्ञासा शांत करने के लिए कहा कि जब हम आजाद हो जाएंगे, तब इन्हें लौटा देंगे.
भट्टाचार्य महोदय ने कहा कि उनके इस उत्तर से मेरा समाधान नहीं हुआ. गहरी सांस लेते हुए भट्टाचार्य महोदय ने कहा कि आजादी के बाद अब तक देश टाटा, बिड़ला और उन सारे पूंजीपतियों का कर्ज और उसका ब्याज देश चुकाते रहने को मजबूर है. उन्होंने कहा कि आपलोग कृपा कर जयप्रकाश बाबू से कहिएगा कि अब बहुत हो गया. इन पूंजीपतियों को अब और ब्याज देना बंद कराएं.
सन् 1975 के जनवरी में हमने बोकारो में जेपी की आमसभा आयोजित की थी. जेपी ट्रेन से बोकोरो पहुचे. दोपहर में हम उनसे मिले. उन्हें जनता सरकार संबंधी अपने अभियान की जानकारी दी. साथ ही भट्टाचार्य महोदय की बातें भी उनको बताई. जवाब में जेपी ने मुझसे पूछा- "आप सर्वोदय कार्यकर्ता हैं क्या?" मैंने जवाब दिया- नहीं. इसके बाद बातचीत का रुख बदल गया.
आज जब लोकसभा चुनावों में व्यापारियों और उद्योगपतियों से भारी मात्रा में चुनाव का चंदा सभी दल ले रहे हैं, तो भट्टाचार्य महोदय का वह प्रश्न मन में कौंधता है कि देश कब तक इन पूंजीपतियों का कर्ज और ब्याज चुकाता रहेगा?....
--कल्याण कुमार सिन्हा
Thursday, 27 February 2014
भारत में भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार : अमेरिकी रिपोर्ट
भारत में भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार : अमेरिकी रिपोर्ट
हम
भारत के चमकने की बात करें,
भारत
के निर्माण या नव निर्माण का
चाहे जितना प्रचार
करें,
जितनी
बातें
करें और अपनी पीठ खुद ठोकते
फिरें,
लेकिन
हम क्या हैं और कहां हैं,
आज
हमारी असलियत हमसे बेहतर
दुनिया के दूसरे लोग
जानते हैं.
हमारे
राजनेताओं ने हमारा और हमारे
देश के चरित्र को दुनिया में
किस हद तक दागदार बना
दिया है,
कितना
गिरा दिया है,
इसका
अंदाजा हमें दूसरों
से ही मिल पाता है.
पढ़िए
अमेरिकी विदेश विभाग की दुनिया
के देशों में मानवाधिकार पर
रिपोर्ट :
Corruption everywhere in INDIA
(भारत
में चारों ओर भ्रष्टाचार
ही भ्रष्टाचार).....
वाशिंगटन
:
अमेरिकी
कांग्रेस की एक रिपोर्ट में
कहा गया है कि भारत में न्यायपालिका
समेत सरकार के हर स्तर पर व्यापक
भ्रष्टाचार है.
अमेरिकी
विदेश मंत्री जॉन कैरी द्वारा
कल जारी इस वार्षिक रिपोर्ट
"कंट्री
रिपोर्ट्स ऑन ह्यूमन राइट्स
प्रेक्टिसेज"
में
कहा गया,
‘‘भ्रष्टाचार
व्यापक स्तर पर है.’’
इस
रिपोर्ट के अनुसार,
हालांकि
आधिकारिक स्तर पर भ्रष्टाचार
होने पर कानून आपराधिक दंड
देता है,
लेकिन
भारत सरकार ने कानून को प्रभावी
ढंग से लागू नहीं किया और
अधिकारी छूट का फायदा उठा कर
भ्रष्ट कामों में लिप्त हो
जाते हैं.
रिपोर्ट
में कहा गया,
‘‘सरकार
के हर स्तर पर भ्रष्टाचार
मौजूद है.
सीबीआई
ने जनवरी से नवंबर माह के बीच
में भ्रष्टाचार के 583
मामले
दर्ज किए हैं.’’
इसमें
कहा गया है ‘‘केंद्रीय सतर्कता
आयोग को वर्ष 2012
में
7,224
मामले
मिले.
5,528 मामले
वर्ष 2012
के
थे और बाकी 696
मामले
2011
से
बचे थे.
आयोग
ने 5,720
मामलों
पर कार्रवाई की सिफारिश की
थी.’’
रिपोर्ट
में कहा गया,
‘‘सीवीसी
ने शिकायतें दर्ज कराने के
लिए टोल फ्री हॉटलाइन और सूचनाएं
साझा करने के लिए एक वेब पोर्टल
शुरू किया.
गैर
सरकारी संगठनों ने पाया कि
घूस आम तौर पर जल्दी काम करवाने
के लिए दी गई। इनमें पुलिस
सुरक्षा,
स्कूल
में दाखिला,
पानी
की आपूर्ति या सरकारी मदद जैसे
काम प्रमुख थे.’’
इसमें
कहा गया कि समाज के संगठनों
ने पूरे साल सार्वजनिक प्रदर्शनों
और भ्रष्टाचार के व्यक्तिपरक
खुलासे करने वाली वेबसाइटों
के जरिए जनता का ध्यान भ्रष्टाचार
की ओर खींचा.
रिपोर्ट
के अनुसार,
संसद
ने दिसंबर में एक विधेयक पारित
करके लोकपाल नामक एक निगरानी
संगठन की स्थापना की,
जो
कि सरकार में भ्रष्टाचार के
आरोपों की जांच करेगा.
विदेश
मंत्रालय ने कहा कि गरीबी
हटाने और रोजगार दिलाने के
कई सरकारी कार्यक्रम खराब
क्रियान्वयन और भ्रष्टाचार
के कारण प्रभावित हुए.
उदारहरण
के लिए आरटीआई कानून के तहत
सरकारी दस्तावेज हासिल करने
के बाद एक याचिकाकर्ता ने
महाराष्ट्र आदिवासी विकास
विभाग के फंड में अनियमितता
के आरोप लगाए.
13
जून
को बम्बई उच्च न्यायालय ने
इसकी जांच के लिए एक विशेष दल
के गठन के आदेश जारी किए.
इस
मामले में आदिवासियों के
कल्याण की राशि अन्य कामों
में खर्च किए जाने का आरोप था.
तिरूवन्नामलाई
के नगर पार्षद के.वी.एन.
वेंकटेश
समेत कई संदिग्धों के खिलाफ
मामले की सुनवाई का इंतजार
साल के अंत तक खत्म नहीं हुआ.
जुलाई
2012
में
सामाजिक कार्यकर्ता राजमोहन
चंद्रा की हत्या इसी मामले
से जुड़ी है.
राजमोहन
ने भ्रष्टाचार करने और जमीन
हड़पने के संदिग्ध सरकारी
अधिकारियों,
नेताओं
और रीयल एस्टेट एजेंटों के
खिलाफ जनहित याचिका दायर की
थी.
बीते
दिसंबर में वर्ष 2012
के
आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाले
में राज्य मुख्यमंत्रियों
और अन्य अधिकारियों की कथित
भूमिका की जांच करने वाले आयोग
ने अपनी रिपोर्ट महाराष्ट्र
विधानसभा को सौंपी थी,
लेकिन
महाराष्ट्र राज्य सरकार ने
इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया.
इस
घोटाले में सैनिकों व उनकी
विधवाओं के लिए आरक्षित
अपार्टमेंट गलत तरीके से
दूसरों को आवंटित कर दिए गए
थे.
विदेश
मंत्रालय ने कहा कि वर्ष 2008
में
2जी
मोबाइल टेलीफोन स्पेक्ट्रम
की बिक्री में धांधली के लिए
रिश्वत लेने के आरोपी पूर्व
दूरसंचार मंत्री ए.राजा
और राज्यसभा सदस्य एम.के.
कनिमोई
के खिलाफ सुनवाई साल के अंत
तक नहीं पूरी हो पाई.
रिपोर्ट
में कहा गया है कि 7
अगस्त
को न्यायमूर्ति आर.ए.मेहता
ने उच्चतम न्यायालय द्वारा
उनकी नियुक्ति बरकरार रखने
के बावजूद गुजरात का लोकायुक्त
बनने से इंकार कर दिया.
उन्होंने
यह टिप्पणी भी की थी कि राज्य
सरकार उनकी जांचों में मदद
नहीं करेगी.
गुजरात
सरकार ने लोकायुक्त की नियुक्ति
में राज्यपाल और उच्च न्यायालय
के न्यायाधीश की प्रमुखता को
कम करने के लिए अप्रैल में
गुजरात लोकायुक्त कानून में
संशोधन की मांग की थी.
इसमें
उसने मांग की थी कि नियुक्ति
की शक्तियां सिर्फ मुख्यमंत्री
के फैसले में निहित हों.
राज्यपाल
ने इस विधेयक पर हस्ताक्षर
से इंकार कर दिया था.
विदेश
मंत्रालय ने कहा कि यह कानून
एक स्वतंत्र न्यायपालिका की
बात करता है और सरकार सामान्यत:
न्यायिक
स्वतंत्रता का सम्मान करती
है। हालांकि ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’
व्यापक स्तर पर मौजूद है.
रिपोर्ट
में कहा गया,
‘‘न्यायिक
व्यवस्था पर काम का बहुत गंभीर
बोझ है और इसमें मामले निपटाने
की आधुनिक व्यवस्था का अभाव
है.
इस
वजह से न्याय मिलने में या तो
देरी होती है या फिर न्याय मिल
ही नहीं पाता.
अगस्त
में कानून मंत्री कपिल सिब्बल
ने कहा था कि उच्चतम न्यायालय
में तीन और उच्च न्यायालयों
में 275
रिक्तियां
हैं.’’
रिपोर्ट
में कहा गया,
‘‘अधीनस्थ
न्यायपालिकाओं में भी रिक्तियों
की संख्या बहुत ज्यादा है.
राज्यों
में 3700
से
ज्यादा पद भरे जाने हैं.
कानून
मंत्री ने मामलों के निपटारे
में हो रहे विलंब का कारण
अदालतों में खाली पदों को
बताया है.’’
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